~ Glimpses of Rishikesh ~

Rishikesh always has a charm, a special attraction for many of us. I have tried to showcase many of its faces in my poetry and pictures.

Let me know your thoughts in the comments.

Have a look at this small B-roll first :


The mountains, the Ganges, the purity of this place will take you to some other level of peacefulness.

First poem is the conversation of self with the beautiful mountains.

Take a look :

Rishikesh Laxman Jhoola Picture

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आ पहाड़ चल साथ बैठे,
बातें करे दो चार हम भी ।

भीगो के पैर थोड़े ,
ताजा करें यादगार हम भी ।

इतना ऊंचा है फिर भी इतना शांत कैसे,
सब कुछ तुझमें ही है फिर ये एकांत कैसे ।

लोग आते हैं तुझमें अपनी पहचान लेने,
खुद को पाने आए इस बार हम भी।

आ पहाड़ चल साथ बैठे,
बातें करे दो चार हम भी।

भीगो के पैर थोड़े ,
ताजा करें यादगार हम भी।

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During the visit, I came across many people. Clicked many amazing street pictures, this in particular, was so beautiful.

Have a look :

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उसकी सफेद दाढ़ी, उसकी आंखों की झुर्रियां,
वो चेहरे पे खुदाई सुकून,
मालूम होता है, इश्क़ पक गया है ।

साथ चलते कदम, आंखों आंखों में हजार बातें,
वो नज़रों का मिलके होंठो का खिलना,
मालूम होता है, इश्क़ पक गया है ।

उसकी पसंद के कपड़े, उसके पसंद का खाना,
वो एक ही शक्स पे मरना वो भी रोज़ाना,
मालूम होता है, इश्क़ पक गया है ।